‘‘लगभग 1,37,000 किलोमीटर के रेल मार्ग और 25,500 से अधिक ट्रेनों के विशाल नेटवर्क के साथ, भारतीय रेलवे देश के एक कोने से दूसरे कोने तक यात्रियों के आवागमन और माल ढुलाई को सुगम बनाकर लोगों को रोजगार से जोडऩे और अर्थव्यवस्था के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है, अधिक नॉन-एसी कोच के साथ भारतीय रेलवे आम नागरिकों की जरूरतों को प्राथमिकता दे रही है, भारत सरकार देश में भारी सब्सिडी वाली रेल यात्रा प्रदान कर रही है, सरकार प्रत्येक यात्री टिकट की लागत का 45 प्रतिशत हिस्सा स्वयं वहन करती है, जिससे आधुनिक यात्रा अनुभव सुनिश्चित होने के बावजूद यहाँ का किराया पड़ोसी देशों और विकसित देशों की तुलना में काफी कम है, कम दूरी की यात्रा को सुगम बनाने के लिए 200 नई इंटरसिटी ट्रेनें और मुंबई हेतु स्वचालित दरवाजों वाली 238 नई उपनगरीय ट्रेनें जल्द शुरू की जाएंगी, पिछले 10 वर्षों में 5 लाख नौकरियों और बीते 2 वर्षों में 1.43 लाख सीधी नियुक्तियों के अलावा, रेलवे की विभिन्न परियोजनाएं लाखों अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी सृजित कर रही हैं, स्टेशन पर बेहतर सुविधाएं और तकनीक-आधारित रख-रखाव पद्धतियां भारत में यात्रा के अनुभव को नया आयाम दे रही हैं,’’
बिलासपुर। भारतीय रेलवे वर्तमान में अभूतपूर्व विस्तार और आधुनिकीकरण के दौर से गुजर रही है, जिसे केंद्रीय बजट 2026-27 में ?2.78 लाख करोड़ के रिकॉर्ड बजटीय आवंटन से सशक्त बनाया गया है। रेल मंत्रालय की अनुदान मांगों (2026-27) पर संसद में हुई चर्चा का जवाब देते हुए, रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने आज रेखांकित किया कि रेलवे में एक प्रमुख संरचनात्मक सुधार रेल बजट का आम बजट में विलय था, जिसके परिणामस्वरूप तीन प्रमुख लाभ हुए हैं। उन्होंने भारतीय रेल के वर्तमान रूपांतरण को ‘धीमी प्रगति’ से ‘सुपर-फास्ट परिवर्तन’ की ओर एक बड़े बदलाव के रूप में वर्णित किया, जो इस राष्ट्रीय परिवहन सेवा के लिए एक नए युग की शुरुआत का प्रतीक है। सबसे पहले, इसने बजटीय सहायता में व्यापक वृद्धि का मार्ग प्रशस्त किया है, जो पहले के लगभग रू.25,000-30,000 करोड़ से बढक़र वर्तमान वित्तीय वर्ष में लगभग ?2.78 लाख करोड़ हो गई है। दूसरा, इसने वर्ष भर निरंतर निर्णय लेने और आवश्यक स्वीकृतियां प्राप्त करने की प्रक्रिया को सुगम बनाया है, जिसमें परियोजनाओं की मंजूरी, नई सेवाओं की शुरुआत और आधुनिक तकनीक को अपनाना शामिल है। तीसरा, इससे प्रणाली में बेहतर पारदर्शिता और संस्थागत निगरानी आई है, जहाँ अब परियोजनाओं की समीक्षा वित्त मंत्रालय और नीति आयोग से जुड़ी प्रणालियों के माध्यम से की जा रही है।
इन्फ्रास्ट्रक्चर का विस्तार और क्षमता में वृद्धि
श्री वैष्णव ने पिछले एक दशक में रेलवे इन्फ्रास्ट्रक्चर में हुए महत्वपूर्ण विस्तार पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि माल ढुलाई 2013-14 के लगभग 1,055 मिलियन टन से बढक़र अब लगभग 1,650 मिलियन टन हो गई है, जिससे भारतीय रेलवे वैश्विक स्तर पर दूसरा सबसे बड़ा माल वाहक बन गया है। रेलवे ट्रैक निर्माण की गति में व्यापक तेजी आई है, जिसके तहत लगभग 35,000 किलोमीटर नई पटरियां बिछाई गई हैं, जबकि इससे पिछली अवधि में यह आंकड़ा लगभग 15,000 किलोमीटर था। विद्युतीकरण के क्षेत्र में भी तीव्र प्रगति देखी गई है, जो लगभग 5,200 किलोमीटर से बढक़र करीब 47,000 किलोमीटर तक पहुँच गई है। इसके साथ ही भारतीय रेलवे ने 99 प्रतिशत से अधिक नेटवर्क विद्युतीकरण का लक्ष्य हासिल कर लिया है। सुरक्षा इंफ्रास्ट्रक्चर के संदर्भ में, रोड ओवर ब्रिज (आरओबी) और रोड अंडर ब्रिज (आरयूबी) की संख्या लगभग 4,000 से बढक़र करीब 14,000 हो गई है। इसी तरह, ऑटोमैटिक सिग्नलिंग (स्वचालित सिग्नल प्रणाली) का विस्तार भी लगभग 1,500 किलोमीटर से बढक़र 4,000 किलोमीटर से अधिक हो गया है। केंद्रीय मंत्री ने यह भी बताया कि एलएचबी कोचों की संख्या में, जो कि अधिक सुरक्षित और आधुनिक हैं, उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और हाल के वर्षों में लगभग 48,000 ऐसे कोच जोड़े गए हैं। इसके साथ ही, लोकोमोटिव का उत्पादन बढक़र लगभग 12,000 यूनिट हो गया है, जबकि वैगन की संख्या 2 लाख यूनिट के आंकड़े को पार कर गई है।
ऐतिहासिक बजटीय आवंटन और रेलवे की मजबूत वित्तीय स्थिति
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि केंद्रीय बजट 2026-27 में भारतीय रेलवे के लिए रिकॉर्ड आवंटन किया गया है, जो देश भर के सभी राज्यों को लाभान्वित कर रहा है और बुनियादी ढांचे के त्वरित विकास को गति दे रहा है। श्री वैष्णव ने स्पष्ट किया कि रेलवे के प्रमुख व्यय मदों में लगभग रू.1.19 लाख करोड़ का कार्मिक व्यय, करीब रू. 64,000 करोड़ का पेंशन व्यय, लगभग रू. 32,000 करोड़ की ऊर्जा लागत और लगभग रू.23,000 करोड़ की वित्त लागत शामिल है। इन भारी खर्चों के बावजूद, रेलवे निरंतर सकारात्मक संतुलन बनाए हुए है। उन्होंने आगे उल्लेख किया कि रेल विद्युतीकरण के परिणामस्वरूप लगभग रू.6,000 करोड़ की बचत हुई है और विद्युतीकरण के बढ़ते दायरे के कारण डीजल की खपत में भी निरंतर गिरावट आ रही है।



